
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
देश में दंत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है, सरकार ने नेशनल डेंटल कमीशन (एनडीसी) का गठन किया है, जो अब देश में दंत शिक्षा और पेशेवर मानकों के नियमन का प्रमुख निकाय होगा
नेशनल डेंटल कमीशन की प्रमुख जिम्मेदारियों में दंत शिक्षा से जुड़े नियम बनाना, संस्थानों का मूल्यांकन करना, मानव संसाधन का आकलन करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और निजी दंत कॉलेजों की फीस के लिए दिशा-निर्देश तय करना शामिल है। इसके साथ ही सामुदायिक दंत स्वास्थ्य, शिक्षा और पेशेवर नैतिकता के लिए भी मानक निर्धारित किए जाएंगे
इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही 1948 का डेंटिस्ट्स एक्ट समाप्त हो गया है और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया भंग कर दी गई है। सरकार का मानना है कि यह सुधार न केवल दंत शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि आम जनता को सस्ती और बेहतर मौखिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम देश में दंत चिकित्सा क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, सरकार ने नेशनल डेंटल कमीशन के चेयनपर्सन के तौर पर डॉ संजय तिवारी तथा डॉ मौसमी गोस्वाममी को पार्ट टाइम सदस्य के रूप में चयनित किया है। इसी क्रम में डॉ चंद्रशेखर जयकिरण को डेंटल एजूकेशन बोर्ड के अध्यक्ष तथा लेफ्टिनेंट जर्नल नंद किशोर साहू को अससेमेंट एंड रेटिंग बोर्ड का अध्यक्ष चुना है।