
- मेडिकल जर्नल जामा में प्रकाशित हुआ शोध पत्र
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
मजबूत मांसपेशियां स्ट्रोक के खतरे को कम करती हैं। अमेरिका की स्वास्थ्य शोध पत्रिका जामा (द जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन) में प्रकाशित एक लेख के अनुसार मांसपेशियों की कमजोरी, पैदल चलने की गति, मजबूत पकड़ या ग्रिप स्ट्रेंथ सीधे तौर पर स्ट्रोक से जुड़ी है। इस संदर्भ में अमेरिका में 4,80,000 लोगों का 14 साल के लंबे समय तक फॉलोअप किया गया। जिसमें 11800 लोगों को स्ट्रोक का खतरा देखा गया। इन लोगों की दिनचर्या फॉलोअप में शामिल ऐसे लोगों से अलग थी जो नियमित व्यायाम या फिर फिजिकल एक्टिविटी में शामिल थे।
अध्ययन के अनुसार ऐसे लोगों जिनकी मांसपेशियां कमजोर थी, उनमें स्ट्रोक का खतरा 30 प्रतिशत अधिक देखा गया, जबकि ग्रिप स्ट्रेंथ कम होने पर स्ट्रोक का खतरा सात प्रतिशत तक बढ़ गया। वहीं स्लो वॉक और मोडिरेट या ब्रिस्क वॉक यानि तेजी से पैदल चलने का भी स्ट्रोक पर अलग तरह से प्रभाव देखने को मिला। पीएसआरआई अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ प्लमोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के चेयरमैन डॉ जीएस खिलनानी ने बताया उम्र के मध्यांतर में कई कारणों की ताकत हर साल एक से दो प्रतिशत कम होती रहती है, इसकी प्रमुख वजहें होती हैं ग्रोथ हार्मोन कहे जाने वाले टेस्टोरन की मात्रा नियमित रूप से कम होना, मांसपेशियों की कमजोर क्षमता या कमजोरी को सरकोपीनिया भी कहा जाता है जो जीवन की गुणवत्ता को कम करती है। अध्ययन में यह बात सामने आई कि धीमी गति से चलने वाले या फिर जिनकी मसल्स स्टेंथ कम होती है, उनमें स्ट्रोक का खतरा अधिक देखा गया है, यह स्थिति उन लोगों में अधिक पाई गई जिन्हें पहले मांसपेशियां कमजोर होने की वजह से स्ट्रोक हो चुका है। जबकि मांसपेशियों की मजबूती उम्र के हर पड़ाव में स्वास्थ्य के लिए रक्षा कवच का काम करती है, मांसपेशियों की मजबूती वेट ट्रेनिंग, वजन उठाने के वयायाम, योगा और एक्सरसाइज से पाई जा सकती है। मजबूत मांसपेशियां बोन डेंसिटी को बढती हैं (फैक्चर का खतरा कम करती हैं) इंसुलिन सेंसिविटी बेहतर करती हैं (जिससे शुगर नियंत्रित रहती है) बुजुर्गो में नियमित व्यायाम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखती है और कोलेस्ट्राल को बेहतर करती है। इसके साथ मजबूत मांसपेशियां तनाव को कम करने, मोबिलिटी बढ़ाने के साथ ही आत्म विश्वास को भी बढ़ाती हैं। इस बात के भी वैज्ञानिक प्रमाण है कि मजबूत मांसपेशियों से लांगिविटी यानि उम्र बढ़ती है।
इसलिए विशेषज्ञ स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम, फिजिकल एक्टिविटी वॉकिंग या साइकिलिंग आदि को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। मांसपेशियों की मजबूती के लिए आहार में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन भी शामिल करना चाहिए, भारतीयों में अधिकतर शाकाहारी खाना पसंद करते हैं, इसलिए मीट या मांस, अंडा आदि से मिलने वाला प्रोटीन उन्हें नहीं मिलना, इसकी जगह प्रोटीन के शाकाहारी विकल्प जैसी पनीर, दालें, अंकुरित अनाज आदि खाने में शामिल करना चाहिए, नियमित डायटरी नाम्स के अनुसार एक व्यस्क के रोजाना के आहार में एक से दो ग्राम प्रोटीन अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए।

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