IMA की राष्ट्रीय स्तर पर पहल “आईएमए पहल: विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह”

“IMA initiative: World No Tobacco Week, running from May 24 to 31, is a week-long, impactful awareness campaign.”
“IMA initiative: World No Tobacco Week, running from May 24 to 31, is a week-long, impactful awareness campaign.”

IMA की राष्ट्रीय स्तर पर पहल “वर्ल्ड नो टोबैको सप्ताह”

डॉ.दिलीप कुमार आचार्य, राष्ट्रीय चेयरमेन, कैंसर और तंबाकू नियंत्रण समिति- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बताया की उनके द्वार प्रोपोज किए गए “IMA वर्ल्ड नो टोबैको वीक” को कि नेशनल प्रेसिडेन्ट डॉ. अनिल कुमार नायक व मानद सचिव डॉ. सरबति दत्ता द्वारा मान्य कर IMA  की समस्त 1700 ब्रांचस को  24 से 31 मई तक वर्ल्ड नो टोबैको वीक के अंतर्गत गतिविधिया करने को कहा गया था।

“आईएमए पहल: विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह 24 से 31 मई तक चलने वाला एक सप्ताह भर का, प्रभावशाली जागरूकता अभियान है। इस पहल का उद्देश्य तंबाकू उद्योग की शोषणकारी विपणन रणनीतियों का पर्दाफाश करना और जनता को तंबाकू के स्वास्थ्य संबंधी खतरों और निकोटीन एवं तंबाकू की लत से मुक्ति के लिए नैदानिक रणनीतियों के बारे में जानकारी देकर सशक्त बनाना है।

डॉ.दिलीप कुमार आचार्य जो मध्य प्रदेश टोबैको फ़्री अलायंस के कन्वीनर भी है ने कहा की -विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 का विषय “आकर्षण का पर्दाफाश – निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला” है। 2026 अभियान तंबाकू उद्योग द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मार्केटिंग और आकर्षक पैकेजिंग रणनीतियों को उजागर करता है। यह दिखाता है कि कंपनियां ई-सिगरेट, सिंथेटिक निकोटीन और निकोटीन पाउच जैसे उत्पादों को बढ़ावा देकर नई, युवा पीढ़ी को कैसे आकर्षित करती हैं।

तम्बाकू उद्योग युवाओं को जीवन भर मुनाफा कमाने के लिए लक्षित करता है, जिससे दुनिया भर में लत की एक नई लहर पैदा होती है। अनुमान है कि 13-15 वर्ष की आयु के 37 मिलियन युवा तंबाकू का उपयोग करते हैं, कई क्षेत्रों में बच्चे भी वयस्कों की तुलना में अधिक मात्रा मै ई-सिगरेट का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन सौभाग्य से हमारे देश में ई-सिगरेट/आईक्यूओएस/ईएनडीएस पर 2019 से प्रतिबंध है। परन्तु उसके बावजूद भी कई ऑनलाइन साइट्स पर ई सिगरेट या निकोटीन पाउच मिल रहे हैं जब की दोनों चीज़ें भारत में प्रतिबंध है

दुनिया कि कई देशों में निकोटीन का प्रचलन बढ़ रहा है वो क्लेम करता हैं की इसमें तंबाकू नहीं है क्योंकि अधिकतर यह सिंथेटिक निकोटीन होता है भारत में 2 और 4 मिली ग्राम के च्युइंग गम तम्बाकू छोड्ने के लिए देते हैं परंतु यह पाउचेस २० मिलीग्राम तक के  भी आते हैं इस कारण से उनसे बहुत नुकसान होता है पेट वि आंतो की गड़बड़िया  होती हैं ब्लड प्रेशर, पल्स रेट बढ़ सकती हैं कैंसर खतरा हो सकता है और जो बच्चे बड़े हो रहे हैं उनके दिमाग़ पर भी इसका बहुत बुरा असर होता है इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ई सिगरेट और तंबाकू जनित और बिना तंबाकू निकोटीन पोइचेस को भी बन किया गया है

 

निकोटीन पाउच -गंभीर लत और निर्भरता

* उच्च रासायनिक क्षमता: पाउच अक्सर निकोटीन गम या लॉज़ेंज की तुलना में रक्तप्रवाह में निकोटीन की अधिक तीव्र और सांद्रित मात्रा पहुंचाते हैं।

* तीव्र डोपामाइन चक्र: यह त्वरित उत्तेजना मस्तिष्क में डोपामाइन की तत्काल वृद्धि को ट्रिगर करती है। जब यह तेजी से कम हो जाती है, तो उपयोगकर्ता को तीव्र तलब महसूस होती है।

* दर्दनाक वापसी: उपयोग बंद करने से अक्सर गंभीर मनोवैज्ञानिक वापसी के लक्षण उत्पन्न होते हैं, जिनमें तीव्र चिड़चिड़ापन, तीव्र चिंता, नींद में गड़बड़ी और एकाग्रता में कमी शामिल हैं।

* दांतों और मसूड़ों को नुकसान

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 1987 में WHO द्वारा शुरू किया गया एक वार्षिक, जागरूकता दिवस है और यह हर साल 31 मई को मनाया जाता है। यह लगभग पूरी दुनिया में लोगों, सार्वजनिक स्वास्थ्य, समुदायों और पर्यावरण के लिए तंबाकू के उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर में इसकी खपत को कम करने के लिए प्रभावी नीतियों की वकालत करने के लिए आयोजित किया जाता है।

तम्बाकू के धुएं में 7000 से अधिक जहरीले रसायन होते हैं। औसतन, धूम्रपान करने से एक व्यक्ति के जीवन के 10 वर्ष कम हो जाते हैं और लगभग जीवन के उत्पादक वर्षों का एक चौथाई भाग तम्बाकू जनित बीमारियों के कारण विकलांगता के कारण नष्ट हो जाता है।

वैश्विक स्तर पर 1.13 अरब लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि अन्य 0.2 अरब लोग अन्य तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। तम्बाकू से हर साल वैश्विक स्तर पर 8.67 मिलियन लोगों की मौत होती है।

यद्यपि लगभग 140 देशों में लोग कई अलग-अलग रूपों में एसएलटी (धूम्र रहित तंबाकू), तंबाकू युक्त गुटका का उपयोग करते हैं, अधिकांश एसएलटी उपयोगकर्ता 199 मिलियन (21% प्रचलन) से अधिक के साथ भारत में रहते हैं। और यही कारण है की दुनिया मैं मुख कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज़  भारत में होते हैं ।

डॉ.आचार्य ने कहा की तम्बाकू का उपयोग दुनिया में मृत्यु और रुग्णता का सबसे रोकथाम योग्य कारण है। तम्बाकू का उपयोग चार मुख्य गैर-संचारी रोगों के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है: कैंसर, हृदय रोग, पुरानी फेफड़ों की बीमारी और मधुमेह। तम्बाकू धूम्रपान से 20 विभिन्न कैंसर, हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियाँ होती हैं और लगभग 1.35 मिलियन (13.5 लाख) भारतीय लोग इसके सेवन से हर साल मरते हैं।

डॉ. आचार्य ने सभी आईएमए के सदस्यों को कहा है कि हमें जनता को तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में बताना चाहिए, युवाओं को किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन शुरू करने से रोकना चाहिए और तंबाकू नियंत्रण और तंबाकू जनित बीमारियों के विषय में हमारे डॉक्टरों, नर्सों, चिकित्सा छात्रों, दंत चिकित्सा छात्रों के ज्ञान को मजबूत करना चाहिए।

तंबाकू त्याग केंद्र (टीसीसी) भारत भर के लगभग सभी दंत चिकित्सालयों व मेडिकल कॉलेज़ो में व कुछ जिला अस्पतालो मै संचालित होने वाले विशेष क्लीनिक हैं।जो लोग तंबाकू छोड्ना चाह्ते है वह यहा से मदद ले सकते है/

डॉ.दिलीप कुमार आचार्य

राष्ट्रीय चेयरमेन, कैंसर और तंबाकू नियंत्रण समिति- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

कन्वीनर-मध्य प्रदेश टोबैको फ़्री अलायंस

डायरेक्टर डिपार्टमेंट ऑफ़ प्रिवेंटिव ऑनकोलॉजी- श्री ऑरोबिंदों इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़

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