
नई दिल्ली, सेहत संवाददाता
भारतीयों में बीते कुछ सालों से वजन कम करने के लिए कई नये तरीके प्रचलित हुए हैं, इसमें एक उपाय कीटो डायट भी हैं, कीटोजेनिक डायट एक लो कार्बोहाड्रेट हाई फैट और मॉडिरेट प्रोटीन आहार पद्धति है। इसका उद्देश्य शरीर को केटोसिस की अवस्था में पहुंचाना होता है, जिसमें शरीर उर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेड यानि ग्लूकोज की जगह वसा को जलाना शुरू कर देता है। जिससे कुछ दिनों में अपने आप वजन कम हो जाता है।
भारतीयों के कीटो डायट फालो करने की बात आती हैं तो निश्चित रूप से एक अलग तरह का मेनू तैयार किया जाना चाहिए, पाश्चात्य सभ्यता में खाने को अधिकतर भून कर या फिर उबाल कर खाया जाता है, जबकि इसके उलट भारतीय भोजन में अनाज, दाल, चावल और विभिन्न प्रकार की सब्जियों का महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए भारतीय भोजन शैली के अनुरूप कीटो डाइट की योजना बनाना आवश्यक हो जाता है। कीटो डायट के लिए एक सुनियोजित डायट प्लान तैयार किया जाना चाहिए, जिससे शरीर में जरूरी पोषण तत्वों की भी पूर्ति होती रहे और अतिरिक्त वसा भी नहीं बढ़ने पाए। बावजून इसके मधुमेह, किडनी रोग, लिवर, गर्भावस्था, स्तनपान या फिर इम्यूनोथेरेपी दवाएं चलने पर चिकित्सक की बिना सलाह कीटो डायट को फॉलो नहीं करना चाहिए।
एक सामान्य भारतीय व्यस्क अपने कीटो डायट में निम्न चीजों को शामिल कर सकते हैं
- अंडे, नाश्ते के समय दो या उम्र के आधार पर
- पनीर, यदि शाकाहार हैं तो अंडे की जगह सौ ग्राम पनीर प्रयोग किया जा सकता है
- टोफू, जिसे सोया पनीर भी कहा जाता है को भी नाश्ते में शामिल किया जा सकता है यदि आप वेगन फूड पसंद करते हैं तो प्रोटीन के लिए टोफू बेहतरीन विकल्प है
- चिकन, यदि मांसाहार है तो चिकन का प्रयोग करें, डीप फ्राई की जगह रोस्टेड चिकन अधिक बेहतर है
- मछली, इसमें पर्याप्त मात्रा में ओमेगा थ्री होता है जो दिल को सुरक्षित रखना है, ग्रिल्ड, बेक्ड या स्टीम्ड मछली अधिक उपयुक्त विकल्प मानी जाती है।
- मटन, मांसाहार होने के बावजूद आपको मटन के सेवन को हमेशा डायट में सीमित मात्रा में रखना चाहिए, हफ्ते में एक बार ही मटन को अपनी डायट में शामिल करें
- झींगा, का सेवन हालांकि भारत में बहुत कम लोग करते हैं, लेकिन कुछ जगहों पर झींगा प्रोटीन के बेहतर विकल्प के तौर पर अब प्रयोग किया जाने लगा है
कीटो डायट में वसा के बेहतर विकल्प
- देसी घी, इससे बेहतर वसा का सुरक्षित विकल्प और कुछ नहीं हो सकता, रोजाना खाने में एक चम्मच देसी शामिल करना चाहिए।
- मक्खन, हालांकि मक्खन में देसी घी से अधिक वसा होता है, बावजूद इसके सीमित मात्रा में मक्खन का प्रयोग किया जा सकता है
- तेल, यदि तेल का प्रयोग करता ही तो वनस्पति या रिफाइंड ऑयल की जगह नारियल तेल, ऑलिव एवाकाडो ऑयल का सीमित प्रयोग किया जा सकता है, हालांकि तेल का इस्तेमाल करने के लिए विशेषज्ञ एअर फ्रायर को अधिक महत्व देते हैं
- सब्जियों के क्या बेहतर विकल्प- पालक, मेथी, सरसों आदि सर्दियों के मौसम में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती हैं, इसलिए सर्दियों में इन हरी सब्जियों का भरपूर प्रयोग करें, जबकि गर्मियों में तुरई, टमाटर, खीरा, ब्रोकली, टिंडा, टमाटर आदि बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते।
नट्स और डेयरी उत्पाद
हालांकि आम भारतीयों में यह धारणा है कि गर्मियों में नट्स या मावा और बीज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनकी तासीन गरम होती है, जबकि ऐसा नहीं है सभी नट्स गरम हो ऐसा नहीं कहा जा सकता, इसका एक बेहतरीन उपाय है ड्राय फ्रूट्स को गर्मी में पानी में भिगोकर खाएं जबकि सर्दियों में हल्के घी में रोस्ट किया जा सकता है, इसी तरह कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, चिया सीड्स, फैलेक्स सीड्स और गोंद कतीरा का प्रयोग भीगो कर किया जा सकता है। डेयरी प्रोडक्ट्स में दही, ताजा क्रीम और फुल फैट दही, पनीर और ताजी क्रीम लेना बेहतर है।
क्या नहीं खाना चाहिए?
कीटो टायट के विषय में अब तक हमने उन सभी खाने की चीजों की चर्चा की जिसे खाया जा सकता है, लेकिन अब सबसे अहम प्रश्न यह उठता है कि आखिर क्या न खाया जाएं जिससे वजन नियंत्रित रहे, कीटो डायट प्लान में सबसे पहले, गेंहू के आटे की रोटी, चावल, मैदा ब्रेड, पास्ता, आलू, शकरकंद, चीनी, कोल्ड ड्रिंक, केला, आम और अंगूर का सेवन पूरी तरह छोड़ना पड़ता है, कुल मिलाकर आप रोटी और चावल न खाएं, खाने में सलाद ले सकते हैं। सीमित मात्रा में स्ट्राबेरी, ब्लूबेरी, नीबू और एवाकाडो लिया जा सकता है। यदि आप सख्त कीटो डायट पर हैं तो दाल का भी सीमित प्रयोग करें।
अब बात करते हैं कि यदि एक भारतीय को कीटो डाइट को फॉलो करना हो तो उसके नाश्ते से लेकर, लंच और डिनर में ऐसा क्या शामिल किया जाएं, जिससे अतिरिक्त वसा या कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम से कम हो।
सुबह का नाश्ता
- सबसे पहले गुनगुना पानी लें
- दो उबले अंडे या पनीर भुर्जी, बिना चीनी की चाय या ग्रीन टी ली जा सकती है, इसके साथ बादाम (8 या 10) या अखरोट (2 या तीन) का सेवन करें
- दोपहर
- पनीर ग्रिल्ड किया हुआ या चिकन
- पालक की सब्जी, सलाद और दही
- शाम या ब्रंच
- नारियल के टुकड़े, ब्लैक कॉफी, बिना चीनी
- रात को डिनर में
- मछली, टोफू या पनीर
- फूलगोभी की सब्जी
- मक्खन में बनी हरी सब्जियां
पानी का सेवन बहुत जरूरी
कीटो डायट शुरू करने के बाद शुरूआती कुछ दिनों में पानी का सोडियम शरीर से तेजी से निकल सकते हैं, इसलिए दिनभर में दो से तीन लीटर पानी पीएं, पर्याप्त या जरूरी नमक का सेवन करें, जिससे शरीर का इलेक्ट्रोलायड इंबैलेंस गड़बड़ न हो, पोटैशियम और मैग्नीशियम वाले खाद्य पद्धर्थों का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें। पहले कुछ दिनों में सिरदर्द, थकान, चक्कर, कमजोरी, कब्ज, मुंह से बदबू या मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है, जिसे कीटो फ्लू कहा जाता है, कुछ दिनों बाद यह अपने आप कम हो जाता है। बावजूद इसके टाइप वन डायबिटिज, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं, गंभीर किडनी या लिवर रोग वाले, खाने से जुड़े विकार की समस्या वाले, बुजुर्ग आदि को कीटो डायट फॉलो करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि कीटो डायट सभी को नहीं लेनी चाहिए। कई लोगों के लिए संतुलित टिकाऊ भारतीय आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी सुरक्षित विकल्प साबित होते हैं।
कीटो डायट से निश्चित रूप से लाभ होते हैं, लेकिन यह व्यक्ति की उम्र और बाकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
- कीटो डायट से वजन कम करने में मदद मिलती है
- भूख कम लगती है
- खून में शर्करा नियंत्रण में लाभ मिल सकता है
- इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार हो सकता है
नोट- जानकारी लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल की पूर्व डायटिशियन डॉ किरन दीवान द्वारा दी गई