सुमोना चक्रवर्ती ने कराई एंडोमिट्रियोसिस सर्जरी, जानें क्या है यह सर्जरी कब हो सकती है परेशानी?

Sumona Chakraborty underwent endometriosis surgery, find out what this surgery is and when this problem can occur
Sumona Chakraborty underwent endometriosis surgery, find out what this surgery is and when this problem can occur
  • आम महिलाओं में यह गलत धारणा है कि एंडोमिट्रियोसिस सर्जरी में बच्चेदानी पर भी असर पड़ता है और वह भविष्य में मां नहीं बन सकती, जबकि ऐसा नहीं है

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

टेलीविजन की कलाकार 38 वर्षीय सुमोना चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने हाल ही में एंडोमेट्रियोसिस सर्जरी कराई है, स्टेज पांच की इस बीमारी का वह लंबे समय से इलाज करा रही थीं, लेकिन सर्जरी के बाद अब काफी राहत है। स्वास्थ्य कारणों से वह पिछले दो महीने से सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी। सुमोना की एंडोमिट्रियोसिस सर्जरी की सूचना के बाद अब महिलाओं में इस को लेकर जिज्ञासा है कि एंडोमेट्रियोसिस क्या है, क्या सर्जरी के बाद भी गर्भधारण किया जा सकता है आदि, इस लेख में पीडियड्स के दौरान होने वाले असहनीय दर्द और इसके इलाज जिसे एंडोमिट्रियोसिस कहा जाता है के बारे में जानकारी जुटाई गई है।

एंडोमेट्रियोसिस क्या है?

एम्स की गायनोकोलॉजी विभाग की पूर्व प्रमुख और मेदांता अस्पताल की वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ सुनीता मित्तल ने बताया कि महिलाओं के गर्भाश्य यानि यूट्रेस के अंदरूनी हिस्से को एंडोमेट्रियम कहा जाता है, सामान्यत यह परत गर्भाश्य के भीतर होती है, लेकिन एंडोमेट्रियोसिस में इसी तरह का ऊतक गर्भाश्य के बाहर जैसे अंडाश्य, फैलोपियन ट्यब, मूलाशय या पेल्विस में भी बढ़ने लगता है, इसकी वजह से पीरियड्स के दौरान न सिर्फ असहनीय दर्द होता है बल्कि कई बार रक्त स्त्राव के साथ खून का थक्का थी निकलता है जो वहीं ऊतक या उनका गुच्छा होता है, महिलाओं में हर महीने महावारी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से ऊतक भी प्रतिक्रिया करते हैं, जिसके कारण नीचले हिस्से या पेलविक में सूजन, लगातार दर्द, चिपचिपाहट और दर्द के साथ रक्त स्त्राव होने होता है।

क्या है इलाज? कब निकाली जाती है बच्चेदानी?

शुरूआती चरण में कुछ व्यायाम और योग से एंडोमेट्रियोसिस को सही किया जा सकता है, लेकिन जब यह उपचार कारगर नहीं होते उस स्थिति में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी या अत्यधिक गंभीर मामले में हिस्टेक्टॉमी या गर्भाश्य को हटाने की सर्जरी की जाती है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में सर्जन दूरबीन द्वारा यूट्रेस की बाहरी सतह पर उपजे ऊतकों को हटा देते हैं, अधिकांश मामलों में यह सर्जरी बहुत कम समय लेने वाली होती है, और मरीज को जल्द ही छुट्टी भी मिल जाती है। इसके उपचार का एक अन्य तरीका हिस्टेकटॉमी भी है, यदि महिला को यह परेशानी उस उम्र है जबकि उसका आगे भविष्य में परिवार बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है और ऊतकों ने यूट्रेस के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया होता है, ऐसी स्थिति में गर्भाश्य निकालने की सर्जरी यानि हिस्टेक्टॉमी का विकल्प अपनाया जाता है, यह भी पूरी तरह महिला की स्वेच्छा पर निर्भर करता है कि वह किस तरह का इलाज अधिक पसंद करती हैं। उपचार से दर्द में राहत मिल जाती है लेकिन ऊतक फिर से उभर सकते हैं इसलिए लगातार चिकित्सक के संपर्क में रहें।

क्या है अहम चुनौतियां

भारत में एंडोमिट्रियोसिस के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसकी पहचान जल्दी नहीं होती, अधिकांश महिलाओं को कम उम्र में जब यह दर्द होता है वह उसे महावारी का सामान्य दर्द मान लेती है कई बार प्रजनन काल में एंडोमिट्रियोसिस होने से गर्भधारण में भी दिक्कत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में 30 से 35 प्रतिशत महिलाओं में प्रजनन की उम्र में एंडोमिट्रियोसिस होता है, जिसकी वजह से गर्भधारण में दिक्कत हुई। 20 से 40 वर्ष की उम्र की महिलओं में एंडोमिट्रियोसिस अधिक देखा गया।

किन महिलाओं में अधिक जोखिम?

  • परिवार में किसी महिला को यदि यह समस्या है तो
  • पहली महावारी यदि कम उम्र में शुरू हुई हो
  • मासिक धर्म लंबे समय तक या अत्यधिक मात्रा में आता हो
  • पहली गर्भावस्था में अधिक देरी भी जोखिम बढ़ा सकता है।

लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

  • मासिक धर्म के दौरान असहनीय दर्द
  • पीरियड्स के पहले और बाद में भी पेल्विक दर्द
  • संभोग के दौरान या बाद में दर्द
  • पेशाब या मल त्याग के समय दर्द, विशेषकर पीरियड्स के दौरान
  • अत्यधिक या अनियमित रक्तस्राव
  • लगातार थकान
  • गर्भधारण में कठिनाई या बांझपन

सेहत365 का संदेश

मासिक धर्म का हल्का दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि दर्द आपकी पढ़ाई, नौकरी, दैनिक जीवन या मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगे, तो यह शरीर का संकेत हो सकता है कि जांच की आवश्यकता है। समय पर पहचान और सही उपचार से एंडोमेट्रियोसिस के साथ भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जिया जा सकता है।

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