स्ट्रोक के बाद बोलने की क्षमता लौटाने में मदद करेगी हिंदी की नई म्यूजिक थेरेपी

A new Hindi music therapy will help in regaining the ability to speak after a stroke, shared research by IIT Delhi, AIIMS, and IHBAAS
A new Hindi music therapy will help in regaining the ability to speak after a stroke, shared research by IIT Delhi, AIIMS, and IHBAAS
  • संगीत की लय और सुर के जरिए बोलने की क्षमता विकसित करेगी यह म्यूजिक थेरेपी
  • आईआईटी दिल्ली, एम्स और इहबास ने किया साझा शोध

नई दिल्ली, सेहत संवाददाता

संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अब स्ट्रोक के बाद खोई हुई आवाज लौटाने का जरिया भी बन सकता है। स्ट्रोक के बाद बोलने की क्षमता खो चुके मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। IIT दिल्ली, एम्स और IHBAS (इंस्टीट्यूट ऑफ ह्युमन बिहे्वियर एंड एलायड साइंसेस) के शोधकर्ताओं ने संगीत और लय पर आधारित मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी (MIT) का पहला हिंदी मॉडल विकसित किया है। शुरुआती अध्ययन में इस थेरेपी से स्ट्रोक के बाद बोलने में दिक्कत झेल रहे मरीजों की बोलने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। यह संगीत आधारित स्पीच थेरेपी है, जो स्ट्रोक के बाद बोलने में आने वाली दिक्कत को दूर करने में मदद करती है। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल Aphasiology में प्रकाशित किया गया है।

यह संगीत आधारित स्पीच थेरेपी है, जो स्ट्रोक के बाद बोलने में दिक्कत झेल रहे मरीजों को दोबारा बोलना सिखाने में मदद करती है। इस पायलट अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय जर्नल Aphasiology में प्रकाशित किया गया है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं। इनमें कई मरीज ऐसे होते हैं जो भाषा समझते हैं, लेकिन शब्द बोल नहीं पाते। खास बात यह है कि ऐसे कई मरीज पुराने गीत गा सकते हैं। इसी क्षमता का उपयोग करते हुए मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी में संगीत, लय और सुर के जरिए धीरे-धीरे बोलने की क्षमता वापस विकसित की जाती है।

अब तक यह थेरेपी अंग्रेजी समेत कुछ पश्चिमी भाषाओं में ही उपलब्ध थी। भारत में हिंदी बोलने वाले मरीजों के लिए इसका कोई स्टैंडर्ड वर्जन ऐसे में शोधकर्ताओं ने सिर्फ शब्दों का अनुवाद नहीं किया, बल्कि हिंदी की ध्वनि, लय और उच्चारण के अनुसर पूरी थेरेपी को नए सिरे से तैयार किया। स्टडी के अनुसार छह हिंदी भाषी स्ट्रोक मरीजों को 45 से 60 मिनट के कुल 40 सत्र दिए गए। सभी मरीजों ने इलज पूरा किया और हर मरीज में जरूरी सुधार देखा गया। मरीज पहले की तुलना में लंबे वाक्य बोलने लगे, बातचीत में सहजता आई और उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया। इलाज के दौरान किसी भी प्रकर का बुरा प्रभाव सामने नहीं आया।

स्टडी से जुड़े IIT दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग ने कहा कि मरीजों में बोलने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों में सुधार देखा गया। वहीं, प्रोफेसर एन. एम. अनूप कृष्णन ने कहा कि यह शुरुआती अध्ययन है और इसमें केवल छह मरीज शामिल थे। इसलिए बड़े स्तर पर और शोध की जरूरत है। टीम इस थेरेपी का डिजिटल संस्करण विकसित करने पर भी काम कर रही है, ताकि देशभर के मरीजों तक इसकी पहुंच आसान हो सके।

इस शोध का नेतृत्व IIT दिल्ली के प्रो. एन. एम. अनूप कृष्णन, प्रो. राहुल गर्ग और एम्स की प्रो. दीप्ति विभा ने किया। शोध दल में IIT दिल्ली, एम्स और IHBAS के इंजीनियर, न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ और स्पीच थेरेपिस्ट शामिल रहे।

क्या है मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी (MIT)?

यह संगीत और लय पर आधारित स्पीच थेरेपी है।

स्ट्रोक के बाद बोलने में दिक्कत वाले मरीजों के लिए उपयोग की जाती है।

मरीज की गाने की बची हुई क्षमता का इस्तेमाल कर बोलने की क्षमता विकसित की जाती है।

अब पहली बार इसका हिंदी संस्करण तैयार किया गया है।

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