नई दिल्ली/गुरुग्राम,
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने 58-वर्षीय मरीज के पेट से 10.3 किलोग्राम वज़न और 35 x 26 से.मी. आकार का भारी-भरकम ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। यमन से इलाज के लिए आए इस मरीज के पेट में पिछले तीन महीने से दर्द बना हुआ था। अस्पताल में डॉ अमित जावेद, सीनियर डायरेक्टर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइटनल आंकोलॉजी, मिनिमल एक्सेस एंड बेरियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के नेतृत्व में डॉक्टरों की कुशल और अनुभवी टीम ने उनके पेट से इस कैंसरग्रस्त ट्यूमर को निकाला, जो फुटबॉल तरह मरीज के पेट में लटका हुआ था।
मरीज मौ. अब्दुल्ला हसन को पेट में दर्द के अलावा काले रंग के मल की शिकायत भी थी, और साथ ही, वह शारीरिक दुर्बलता तथा एनीमिया से भी ग्रस्त थे। इससे पहले, मौ. अब्दुल्लाह इलाज के लिए शहर के अन्य कई अस्पतालों के भी चक्कर लगा चुके थे, लेकिन इस मामले से जुड़े रिस्क की वजह से कहीं भी इलाज नहीं हो सका। आखिरकार, वह फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम आए जहां भर्ती के बाद उनके पेट का सीटी स्कैन करने पर इस ट्यूमर का पता चला। डॉक्टरों की टीम ने ट्यूमर को हटाने के लिए गैस्ट्रक्टमी (इस सर्जिकल प्रक्रिया में पूरे पेट को या कुछ भाग को निकाला जाता है) की। मरीज के पूरे पेट को इस ट्यूमर ने ढक रखा था और पेट से चिपका हुआ था, यही कारण था कि सर्जरी कर मरीज के पेट को बाहर निकालना पड़ा। यह सर्जरी लगभग 6-7 घंटे चली और मरीज को 9 दिनों बाद स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।
इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ अमित जावेद, सीनियर डायरेक्टर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइटनल आंकोलॉजी, मिनिमल एक्सेस एंड बेरियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने बताया, “यह सर्जरी ट्यूमर के साइज़ के चलते काफी चुनौतीपूर्ण और जटिल बन गई थी। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर ने पूरे पेट को घेर लिया था और इसकी वजह से प्रमुख रक्तवाहिकाओं पर दबाव बढ़ गया था तथा मरीज की छोटी आंत, पेट, पैंक्रियाज़, स्पलीन एवं ड्यूडनम जैसे अंग भी प्रभावित हो रहे थे। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (जीआईएसटी) दुर्लभ किस्म के ट्यूमर होते हैं, इनमें कुछ अपेक्षाकृत बिनाइन होते हैं, जबकि अन्य काफी आक्रामक किस्म के भी हो सकते हैं। इस तरह के कैंसर की सबसे सामान्य जटिलता यह होती है कि इनसे रक्तस्राव होता है, जो कैंसर के साइज़ की वजह से जीवनघाती भी साबित हो सकता है। इस मामले में हमारी खुशनसीबी यह रही कि हम भारी रक्तस्राव से पहले ही इसे निकालने में कामयाब रहे।
पेट कई प्रकार की शारीरिक कार्यप्रणालियों से जुड़ा हुआ होता है, और यहीं पर हमारे द्वारा ग्रहण किया गया भोजन भी स्टोर होता है। हमने मरीज के पेट को रीकंस्ट्रक्ट करने के लिए, उनकी छोटी आंत से एक थैली (पाउच) बनाकर उसे ईसोफैगस/भोजन नली से जोड़ दिया। अब मरीज की हालत स्थिर है और वह स्वास्थ्यलाभ कर रहे हैं।”
यश रावत, वीपी और फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम ने कहा, “यह मामला मरीज के ट्सूमर के आकार और वज़न के चलते काफी जटिल था।