बच्चों में क्यों बढ़ रही है कब्जियत?

Kiddocracy founder and senior journalist Parimal Kumar had a special conversation with Delhi's renowned pediatrician Dr. Amit Kumar
Kiddocracy founder and senior journalist Parimal Kumar had a special conversation with Delhi’s renowned pediatrician Dr. Amit Kumar

 

दिल्ली के नामी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार से खास बातचीत की Kiddocracy के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार

परिमल कुमार ने

आजकल बच्चों में कब्जियत (Constipation) की समस्या लगातार बढ़ रही है। दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित Kiddiewink Child Care Clinic के प्रमुख बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार का कहना है कि हर दूसरे-तीसरे बच्चे में यह परेशानी देखने को मिल रही है।

 

क्या कहते हैं डॉक्टर अमित?

कब्जियत की सबसे बड़ी वजह है न चबाना सीखना। जो बच्चे शुरू से चबाना नहीं सीखते, उन्हें बाद में पाचन से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

6 महीने के बाद जब ठोस आहार शुरू होता है, तब फलों और फाइबरयुक्त भोजन का होना ज़रूरी है।

फाउल्टी फीडिंग यानी ग़लत तरीके से खाना खिलाने से भी कब्जियत की समस्या सामने आती है।

दूध पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर रहना भी ठीक नहीं है। एक उम्र के बाद बच्चों को दूध से ज्यादा सॉलिड फूड पर ध्यान देना चाहिए।

कब्जियत को लेकर अहम बातें

6 महीने से पहले अगर बच्चा एक हफ्ते तक पोटी न करे तो यह सामान्य है।

6 महीने के बाद कब्जियत की समस्या बढ़ने लगती है, इसलिए सही खानपान बेहद ज़रूरी है।

6 महीने से 1 साल की उम्र में बच्चा चबाना सीख लेता है। अगर इस समय परिवार बच्चे को चबाना नहीं सिखाता तो आगे जाकर दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

डॉ. अमित की सलाह

👉 6 महीने के बाद बच्चों को दिन में 4 बार खिलाएं।

👉 सेमी सॉलिड चीजें शामिल करें – खिचड़ी, दलिया, खीर, ओट्स, चिला और पर्याप्त पानी।

👉 दूध की फ्रीक्वेंसी कम करें और फाइबरयुक्त आहार पर जोर दें।

👉 बच्चे को चबाने की आदत जरूर डालें।

लाइफस्टाइल का भी असर

डॉ. अमित का कहना है कि बच्चों में कब्जियत की एक बड़ी वजह आज की लाइफस्टाइल भी है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी, बाहर खेलकूद न करना और मोबाइल-टीवी पर ज्यादा समय बिताना भी समस्या को बढ़ा रहा है।

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