
नई दिल्ली, परिमल कुमार
आप अपने बच्चे की अच्छी परवरिश करना चाहते हैं, लेकिन क्या ऑनलाइन सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं? घर में स्मार्ट टीवी, लैपटॉप, टैबलेट, डेस्कटॉप और गेम कंसोल—सब इंटरनेट से जुड़े हैं। यानी पूरी दुनिया बच्चे की उंगलियों पर है। लेकिन सवाल है कि क्या सारा कंटेंट बच्चों के लिए सही है? और क्या माता-पिता निगरानी रख रहे हैं?
हाल ही में अमेरिका की The Family Online Safety Institute (FOSI) ने 10 से 17 साल के 1000 बच्चों और उनके 1000 माता-पिता पर सर्वे किया। इसमें खुलासा हुआ कि अधिकतर माता-पिता पैरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल ही नहीं करते, जिससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
भारत में भी इस मुद्दे पर चिंता जताई गई है। बच्चों के अधिकारों की संस्था NCPCR के तत्कालीन अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने Kiddocracy से बातचीत में कहा था कि ऐसा सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नज़र रख सकें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि वे सभी ऐप्स मोबाइल से हटा दिए जाएं, जिन्हें बच्चे के साथ मिलकर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
FOSI के सर्वे में सामने आया कि पैरेंटल कंट्रोल्स का इस्तेमाल टैबलेट पर सिर्फ 51%, स्मार्टफोन पर 47%, गेम कंसोल पर 35%, डेस्कटॉप पर 43%, लैपटॉप पर 38% और स्मार्ट टीवी पर 35% माता-पिता ही करते हैं। बाकी बच्चे बिना किसी निगरानी के इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं।
साफ है कि ऑनलाइन मौजूद हर चीज़ बच्चों के लिए नहीं होती। ऐसे में बतौर पेरेंट हमें सतर्क रहने और पैरेंटल कंट्रोल्स का सहारा लेने की ज़रूरत है। वरना पेरेंटिंग की यह चूक बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल सकती है।
संस्थापक : किड्डोक्रेसी ( Kiddocracy)

Parimal Kumar, Senior Journalist