कौन है iPad Kids और कैसे बढ़ी है इनकी समस्या ?

The University of California, San Francisco has conducted a study. The findings of this study have been revealed by BMC Public Health, which researched the effects on children in the era of increasing technology after 2010 and the declining levels of children's mental health after 2011.
The University of California, San Francisco has conducted a study. The findings of this study have been revealed by BMC Public Health, which researched the effects on children in the era of increasing technology after 2010 and the declining levels of children’s mental health after 2011.

नई दिल्ली, परिमल कुमार

क्या आपका बच्चा चिंता (Anxiety), ध्यान की कमी (Attention Deficit), आक्रामकता (Aggression) और डिप्रेशन का शिकार तो नहीं है? स्क्रीन पर बिताए गए समय (Screen Time) के बच्चों पर बढ़ते नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए, सैन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया ने एक अध्ययन किया है। इस अध्ययन का खुलासा BMC पब्लिक हेल्थ ने किया है, जिसमें 2010 के बाद बढ़ती टेक्नोलॉजी के दौर में बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों और 2011 के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के गिरते स्तर पर शोध किया गया है।

क्या आप जानते हैं, iPad Kids किसे कहा जाता है?

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया द्वारा की गई एक स्टडी, जिसका शीर्षक है “For PreTeens More Screentime is Tied to Depression and Anxiety Later”, में 2010 के बाद टेक्नोलॉजी के दौर में पैदा हुए बच्चों को यह नाम दिया गया है।

iPad Kids वे बच्चे हैं जो दिन में औसतन 5:30 से 8:30 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। इन बच्चों का न तो व्यायाम से कोई लेना-देना होता है, और न ही उनका कोई सक्रिय सामाजिक सर्कल होता है। उनके लिए घर-परिवार, खेल का मैदान, दोस्त—सब कुछ केवल उनका मोबाइल और कंप्यूटर ही बन जाता है।

स्टडी में क्या पाया गया?

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया ने अपनी स्टडी में 9538 बच्चों के एक समूह को शामिल किया और उन्हें दो साल तक ट्रैक किया। स्टडी में यह पाया गया कि 8-12 साल के बच्चे, जो प्री-टीन्स की श्रेणी में आते हैं, औसतन प्रतिदिन 5 घंटे 30 मिनट स्क्रीन पर बिता रहे हैं। वहीं, टीनएजर्स यह समय बढ़ाकर लगभग 8 घंटे 30 मिनट तक स्क्रीन पर बिताते हैं।

इस स्क्रीन टाइम में पढ़ाई को छोड़कर बच्चे ज्यादातर वीडियो कॉल, टेक्स्टिंग, फिल्में देखने और वीडियो गेम खेलने में रुचि लेते हैं। स्टडी के अनुसार, स्टडी में शामिल हाई स्कूल जाने वाले 42% बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के स्तर में गिरावट देखी गई। इनमें चिंता (Anxiety), ध्यान की कमी (Attention Deficit), आक्रामकता (Aggression) और डिप्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

विशेष रूप से, 2011 के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट के मामलों में 50% की वृद्धि देखी गई है।

बच्चों को iPad Kid बनने से रोकने के लिए माता-पिता क्या करें?

बच्चों को स्क्रीन टाइम की आदत आखिर पड़ती कैसे है? जब बच्चा रोता है, तो माता-पिता उसे चुप कराने के लिए फोन पकड़ा देते हैं। जब बच्चा अपने साथ खेलने की जिद करता है, तो उसे मोबाइल दे दिया जाता है। अगर माता-पिता के पास बच्चे के साथ बैठकर बात करने, खेलने, या उसे पार्क में घुमाने के लिए समय नहीं होता, तो वे अक्सर उसे स्क्रीन के हवाले कर देते हैं। धीरे-धीरे यह आदत स्क्रीन टाइम में बदल जाती है। ऐसे कई उदाहरण हमारे आस-पास, पड़ोस में या दोस्तों के बीच आसानी से देखे जा सकते हैं।

Kiddocracy यह नहीं कहता कि स्क्रीन टाइम को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए। यदि जरूरत हो, तो स्क्रीन का उपयोग करना जरूरी भी है। लेकिन माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह स्क्रीन टाइम उनके बच्चों की आदत न बन जाए।

इसके लिए माता-पिता को अपने कामों से समय निकालकर बच्चों के साथ समय बिताना होगा। उनके साथ खेलना, बातचीत करना, और उन्हें आउटडोर गतिविधियों में शामिल कराना , बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के सबसे प्रभावी तरीके हो सकते हैं।

लेखक Kiddocracy के संस्थापक हैं

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