
लखनऊ
पैरों में यदि काफी समय से सूजन हो और चलने-फिरने में दर्द महसूस हो। सीढ़ी चढऩे के दौरान तकलीफ और बढ़ जाये, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। यह समस्या लिंगामेंट इंजरी हो सकती है। यह चोट एक्सरे जांच में पकड़ में नहीं आती है, एमआरआई जांच करानी पड़ती है।यह जानकारी डा. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हड्डी रोग विभाग के प्रमुख डा विनीत कुमार ने विभाग के स्थापना दिवस के दौरान दी। उन्होंने कहा कि विभाग का यह पहला स्थापना दिवस पूर्व विभागाध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. सचित अवस्थी का समर्पित है। उनकी याद में एक ओरेशन भी हुआ। डॉ. विनीत ने बताया कि कई बार घुटने में चोट लगने के बाद व्यक्ति घुटनों पर जोर नहीं दे पाता। सीढिय़ा चढऩे के दौरान दर्द महसूस होता है। सामान्य रूप से दर्द नहीं होता केवल जोर देने पर ही होता है। यह लक्षण भी लिगामेंट इंजरी के हैं। व्यक्ति को ऐसा लगता है कि हड्डी की समस्या से दर्द हो रहा है और इसके लिए वह एक्सरे करवाता है मगर उसमें कुछ भी उजागर नहीं होता। डॉ. विनीत ने कहा एमआरआई जांच से ही लिगामेंट की चोट का पता चल पाता है। समय पर रोग की पहचान हो जाए तो इलाज आसानी से किया जा सकता है। दवा के साथ फिजियोथेरेपी जरूरी होता है। इलाज में देरी घातक साबित हो सकती है। ऑपरेशन तक कराना पड़ सकता है। हड्डी रोग विभाग के डॉ. स्वागत महापात्रा ने कहा कि सडक़ हादसे बढ़ रहे हैं। अब मल्टीपल फ्रैक्चर के मामले सामने आ रहे हैं। लिहाजा ऐसे हादसे में घायलों को बहुत ही सावधानी पूर्वक एम्बुलेंस से अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में पीजीआई में हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पुलक शर्मा ने चोटों के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डाला। स्वर्गीय डॉ. सचिन अवस्थी की याद में हुए ओरेशन में व्याख्यान देते हुए केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि अब पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक्स, दूरबीन विधि से हड्डी के बड़े ऑपरेशन किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रयोग हो रही तकनीकों के बारे में भी बताया।