
- मेडिकल उपकरणों की एमआरपी और प्राइस रेगुलेशन को लेकर विशेषज्ञों ने जाहिर की चिंता
- सरकार के प्रयास से 12 जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमत की जा सकती है निर्धारित
नई दिल्ली सेहत संवाददाता
प्राइवेट अस्पताल इलाज के दौरान मेडिकल उपकरणों पर मनमानी कीमत वसूलते हैं। तीन रुपए में मिलने वाले सीरिंज का 30 रुपए लिया जाता है, वहीं 62 रुपए की आईवी कैन्यूला की कीमत 120 रुपए ली जाती है, पेसमेकर की लागत जहां 25 हजार रुपए होती है, प्राइवेट अस्पताल बिलिंग में इसकी कीमत दो तीन लाख रुपए तक वसूलते हैं, इसी तरह हार्ट वाल्व भी चार लाख का आता है, जिसके लिए अस्पताल 26 से 30 लाख रुपए का बिल थमा देते हैं। अस्पतालों की बढ़ती कीमत पर लगाम कसने के लिए सरकार 12 जरूरी लाइफ सेविंग उपकरणों की प्राइस कैपिंग कर सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नेशनल फार्मासि्युटिल्स प्राइसिंग ऑथॉरिटी फार्मास्यूटिकल विभाग मेडिकल डिवाइस के लिए मूल्य नियमों की समीक्षा पर विचार कर रहे हैं। जिससे मरीजों तक किफायती मूल्यों पर मेडिकल उपकरण पहुंच सकें।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के फोरम कोऑडिनेटर राजीव नाथ ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इससे पहले 20 अप्रैल को चिकित्सीय उपकरणों की एमआरपी और प्राइस रेगुलेशन को लेकर आयोजित एक जूम मिटिंग में इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने विषय पर गहन मंत्रणा की और लाइफ सेविंग उपकरणों की कीमत निर्धारण की पैरवी थी।
हम सभी अपने जीवनकाल में एक न एक बार प्राइवेट या निजी अस्पतालों की ऐसी मनमानी का शिकार हुए होगें, जिसमें की अस्पताल का बिल देखकर हताशा हासिल हुई हो। नीति निर्धारण तत्व, सरकार, स्टेकहोल्डर जैसे कानूनी विशेषज्ञ, मेडिकल उपकरण इंडस्ट्री और उपभोक्ता जारूकता संगठनों ने जुड़े लोग इसके प्रति सजग है। फेयर प्राइस, फेयर केयर विषय पर जानकारी देते हुए एआईएमईडी के राजीव नाथ ने कहा कि दवाओं की तरह के नियम मेडिकल उपकरणों पर भी लागू होने चाहिए, प्राइवेट अस्पताल मरीजों से कइ गुना मार्जिन पर कीमत लेते हैं, जिससे जीवन रक्षक उपकरणों पर भी मरीजों को काफी खर्च करना पड़ रहा है। मेडिकल उपकरणों के लिए भी पृथक नियम बनाए जाने चाहिए, जिससे मरीजों को कम कीमत पर बेहतर मेडिकल उपकरण मिल सकें और उनके इलाज में बाधा न आए। राजीव नाथ ने कहा कि मरीजों के पास यह अधिकार नहीं होता कि वह अपनी मर्जी से उपकरणों का चयन कर सकें या कीमतों में मोलभाव कर सकें, इस लिहाज से उपकरणों की प्राइस कैपिंग बहुत जरूरी है। इससे पहले सरकार ने दिल के इलाज में इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेंट और घुटनों के लिए नी इंप्लांट की प्राइस कैपिंग की थी, जिसमें कीमतों में 70 प्रतिशत तक की कमी आ गई। द अवेयर कंज्यूमर के एडिटर प्रो़ बेजोन कुमार मिश्रा ने बताया कि प्राइस कैपिंग से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सकेगी, हर साधारण लोग भी प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच सकेंगे।

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